APNI DUNIYA ...... OUR WORLD


Monday, January 25, 2010

Today's Headlines.......


#भाजपा ने भारी चूक बताया, पीएमओ ने मांगी माफी
-महिला व बाल विकास मंत्रालय की ओर से जारी एक विज्ञापन को भाजपा ने भारी चूक करार दिया है। इस मामले के मीडिया में तूल पकड़ने के बाद सरकार ने तत्काल इस मुद्दे पर देशवासियों से माफी मांग ली है।
#उत्सर्जन कटौती के लक्ष्य 31 जनवरी तक बताएंगे बेसिक देश
-बेसिक देशों के मंत्रियों की कार्बन उत्सर्जन में कटौती के स्वैच्छिक कदमों के बारे में यूएनएफसीसीसी को 31 जनवरी तक सूचित करने की मंशा है।
#लादेन फिर गुर्राया, अमेरिका पर हमले की धमकी दी
-अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका को धमकी दी है कि यदि उसने अपनी विदेश नीति में बदलाव नहीं किया तो उस पर और हमले होंगे।
#शीर्ष पदों पर बैठे कार्यकारी सबसे ज्यादा भ्रष्टः सर्वे
-बाजार अनुसंधान एवं सलाहकार फर्म मार्केटिंग एंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएटस के सर्वेक्षण के अनुसार, कारपोरेट जगत में निचले स्तर की तुलना में वरिष्ठ कार्यकारी भ्रष्टाचार में ज्यादा लिप्त हैं। निचले प्रबंधन के स्तर पर भ्रष्टाचार का प्रतिशत 83.4 है, तो मध्यम स्तर पर यह 88.1 प्रतिशत है। वरिष्ठ कार्यकारियों के स्तर पर भ्रष्टाचार का स्तर 90.2 प्रतिशत है।
#पवार की बर्खास्तगी चाहती है भाजपा
-महंगाई को लेकर चौतरफा घिरी सरकार के कृषि मंत्री शरद पवार पर तीखा आक्रोश जताते हुए भाजपा ने उन्हें बर्खास्त करने की मांग की है। राजग कार्यकाल के समय से महंगाई की तुलना करते हुए पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जनता के बजाय सटोरियों और जमाखोरों के लिए राह बना रही है।
#सेक्स वर्कर्स संग घर बसाएंगे डेरा समर्थक
-डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम के अनुयायियों ने कोलकाता और दिल्ली के सेक्स वर्कर्स की जिंदगी में खुशहाली लाने का फैसला किया है। करीब चौदह सौ डेरा समर्थक युवक इन यौनकर्मियों के साथ घर बसाने की तैयारी में हैं। सोमवार को हरियाणा के सिरसा में डेरा द्वारा आयोजित समारोह में ये युवक वेश्याओं से शादी करने का संकल्प लेंगे।
#रसोई गैस पर सब्सिडी जारी
-सरकार ने फिलहाल किरोसिन और एलपीजी गैस सिलेंडरों पर खत्म हो रही सब्सिडी को अगले पांच साल के लिए बढ़ाने की योजना बना ली है।

Sharm ka Vishaya Hai....!

Sharm ka Vishaya Hai....!
Ye kab tak chalega ?

ANAND KUMAR

ANAND KUMAR
super 30..... renowned institute for IIT JEE in India.

आखिरकार आत्महत्या क्यों कर रहे हैं बच्चे ?

- मीनाक्षी

4 जनवरी

‘‘11 साल की नेहा काफी अच्छा नाचती थी वह बूगी बूगी सहित तीन टीवी रियलिटी शो में अपनी इस कला का लोहा मनवा चुकी थी।’’नेहा डांस के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देने की माता-पिता की जिद की वजह से तनाव में थी।’’
‘‘स्टैंडर्ड सात में पढ़ने वाले सुसशांत पाटिल सोमवार की सुबह सात बजे स्कूल आए, लेकिन क्लास में नहीं दिखे हाजिरी के वक्त उनकी गैरमोजूदगी देख उन्हें खोजा जाने लगा तो टॉयलेट में उनकी लाश झूलती पाई गई। बताया जाता है पढ़ाई में असफलता को लेकर दबाव में था।’’
‘‘दादर के शारदा आश्रम स्कूल के छात्र सुशांत के बारे में पुलिस का कहना है कि वह सेमेस्टर परीक्षा में चार विषयों में फेल हो गया था सी से उपजे अवसाद के चलते उसने यह खतरनाक कदम उठाया।’’
मेडिकल की पढ़ाई करने वाली 18 साल की भजनप्रीत भुल्लर ने भी पवई स्थित अपने घर पर खुदकशी कर ली। वह सायकोथेरेपी की छात्र भजनप्रीत फेल हो चुकी थी।
नजफगढ़ के नंदा एंक्लेव में उन्नीस साल की रीना ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसके पास से एक नोट मिला है जिसमें उसने अपनी मर्जी से खुदकुशी करने की बात लिखी है। वह कैर गांव स्थित भगिनी निवेदिता कालेज में पढ़ती थी। उसके पिता श्री ओम फौज से रिटायर है। पुलिस को जांच में पता चला है कि वह पिछले कुछ समय से तनाव में रहती थी।
दक्षिण पुरी की रहने वाली हिमांशी के प्री-बोर्ड परीक्षा में कम अंक आए थे और वह तीन विषय में फेल हो गई थी। छात्र की एक नोटबुक पुलिस को मिली है जिसमें उसने गत 25 दिसंबर को आए दिन मां द्वारा डांटने-फटकारने की बात लिखी है। उसके परिजनों का आरोप है कि कम अंक लाने पर छात्र के साथ स्कूल में गलत व्यवहार किया जाता था जिस कारण से उसने खुदकुशी कर ली।
यदि हाल में हुई इन घटनाओं की तरह नजर डालें तो ज्यादातर बच्चों ने पढ़ाई को लेकर दबाव बढ़ा, माता-पिता अनबन को लेकर आत्महत्या की है। अधिकांश बच्चों पढ़ाई के दबाव से परेशान थे। मनोचिकित्सकों के मुताबिक आइडियल चाइल्ड सिंड्रोम से ग्रस्त अभिभावक बच्चों को स्पेशल किड से स्मार्ट किड तथा स्मार्ट किड से सुपर किड बनाना चाहते हैं।
आज अभिभावक अपने बच्चों को लेकर महत्वाकांक्षी हो गए हैं। वे चाहते हैं कि उनका बच्चा रातो रात सुपर सितारा बन जाए लेकिन इस दबाव से बचपन खोता जा रहा है। दूसरे वे अपने खोए हुए सपनों को बच्चों के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं। इसके कारण वे बच्चों को थोड़ी देर भी खेलने जाने नहीं देते। खिलापिला कर सुला देना फिर उठते ही पढ़ने के लिए कहना आदि बातें कई बार उन्हें बेहद तनाव में ले आती हैं. इससे बच्चों की रही सही परफॉरमेंस भी गड़बड़ा जाती है। कोमल सपनों पर तब नजर लग जाती है जब उसमें माता-पिता अपने सपनें जोड़ देते हैं। थोपी हुई चीज उनको पसंद नहीं आती और यहीं से पैदा होते हैं तनाव। यह तनाव पढ़ाई के प्रति अरुचि तो पैदा करते ही हैं विद्रोही भी बनाते हैं।
बच्चों में गहराती निराशा स्वपनहीनता की चरम सीमा स्थिति है आत्महत्या। बच्चों आखिरकार आत्महत्या क्यों कर रहे हैं उन्हें क्यों लगता है कि इस दुनिया में अब उनकी किसी को जरूरत नहीं है या दुनिया उनके किसी काम की नहीं। इन सवालों के जवाब में डॉ. अरुण कुमार कहते हैं कि बच्चों जिन प्रकट कारणों के चलते आत्महत्या कर रहे हैं उनमें तीन कारण सबसे प्रमुख हैं जीवन की जटिलता के दबाव, बढ़ता एकाकीपन और प्रतियोगिता में पिछड़ने की आशंका। गौर करने की एक महत्वपूर्ण बात यह भी है एक महीने में दिल्ली के 4 बच्चों ने आत्महत्या केवनल 5 से 18 साल की आयु समूह के थे यानी किशोर और उससे पहली की आयु के।
बच्चों को आत्महत्या के लिए उकसाने वाला एक और महत्वपूर्ण तथ्य है उनकी जिन्दगी में बढ़ा एकाकीपन पहले एकाकीपन सिर्फ अति संपन्न लोगों की जिंदगी का हिस्सा था पिछले कुछ सालों से शहरी जीवन जिस कदर जटिल और महंगा हुआ है उसके कारण आम मध्यम वर्गीय घरों में भी महिलाओं का नौकरी करना भी अनिवार्य हो गया है। ऐसे में उन वर्गो के बच्चों भी अब अकेलेपन की समस्या ङोल रहे हैं। जो पहले घरों के अभावों या माता-पिता के बीच की लड़ाइयों से भले परेशान रहते थे लेकिन उनकी जिंदगी में मां बाप की दूरी नहीं थी।बच्चों की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार जो एक तथ्य है वह मौजूद पढ़ाई का ढ़ांचा। आज मां-बाप नहीं, बच्चों खुद अपने से इतनी ज्यादा उम्मीद करने लगे हैं कि वे बच्चों कम रोबोट में तब्दील हो गए हैं।
दूसरी तरफ पहले पाठ्यक्रम औसत बुद्धि वाले बच्चों को ध्यान में रख कर बनाया जाता था लेकिन जैसे-2 प्रतियोगिता बढ़ रही है पाठ्यक्रमों का गठन भी जीनियस के हिसाब से किया जा रहा है। नतीजतन जरूरत से ज्यादा होमवर्क, हर हफ्ते यूनिट टेस्ट और परीक्षा का जबाव हमेशा बना रहता है। इस पर भी अभिभावक बच्चों की प्रतिभा का मूल्यांकन किए बिना उससे हमेशा अव्वल आने की उम्मीद करते हैं। यही अपेक्षा बच्चों को कुंठित बनाती है और आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करती है।

Followers