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Wednesday, December 23, 2009

today's headlines.....23-12-2009 (Wednesday)


#क्लाइमेट चेंज पर सरकार ने रुख बदलने की बात मानी
- पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश ने यह माना है कि सम्मेलन से पहले सरकार ने जो आश्वासन दिए थे, उनसे वह एक मुद्दे पर पीछे हटी है। यह मुद्दा है 'अंतरराष्ट्रीय सलाह-मशविरे और विश्लेषण' के प्रावधान की इजाजत देना। सरकार ने पहले कहा था कि क्लाइमेट चेंज पर देश के कार्यक्रमों के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सिर्फ सूचित किया जाएगा। रमेश मंगलवार को राज्यसभा में कोपनहेगन सम्मेलन पर बयान दे रहे थे।
#अल्पसंख्यक छात्रों के लिए स्कॉलरशिप की शुरुआत
- नई दिल्ली । अल्पसंख्यक और कंपनी मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने मंगलवार को अल्पसंख्यक छात्रों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना (नैशनल स्कॉलरशिप स्कीम) की शुरूआत की।
खुशीद ने इस अवसर पर कहा कि, अभी तक उच्च शिक्षा में अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की संख्या कम है इस बात को ध्यान में रखते हुए यह योजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को एम फिल और पीएचडी की शिक्षा के लिए पांच वर्ष तक स्कॉलरशिप प्रदान करना है।
इस योजना को अमली जामा यूजीसी द्वारा पहनाया जाएगा और हर साल 756 छात्रों को स्कॉलरशिप मिलेगी। नैशनल स्कॉलरशिप स्कीम में से 30 फीसदी छात्रवृत्तियां महिलाओं के लिए होंगी। अन्य छात्रों के लिए आरक्षण यूजीसी के मानकों के अनुसार होगा।
#ड्राइवर ने की थी आईआईएम प्रोफेसर की हत्या
- इंदौर ।  आईआईएम, इंदौर कैंपस में पिछले दिनों हुई प्रोफेसर अमृता पंचोली की हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। इंदौर पुलिस ने मंगलवार को यह दावा क
रते हुए कहा कि प्रोफेसर की हत्या के लिए दोषी दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अनिल की पत्नी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस मामले में मुख्य आरोपी प्रोफेसर के ड्राइवर अनिल पटेल को बनाया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से एटीम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किया गया है। हत्या में इस्तेमाल चाकू को भी बरामद कर लिया गया है।
#गेहूं के मूल्य में 200 रुपये की कटौती का ऐलान
- नई दिल्ली । महंगाई से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने खुले बाजार में जारी होने वाले गेहूं के मूल्य में 200 रुपये की कटौती का ऐलान किया है। मूल्य घटाने के मसौदे पर मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह [ईजीओएम] ने पहले ही मुहर लगा दी थी।

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Sharm ka Vishaya Hai....!

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Ye kab tak chalega ?

ANAND KUMAR

ANAND KUMAR
super 30..... renowned institute for IIT JEE in India.

आखिरकार आत्महत्या क्यों कर रहे हैं बच्चे ?

- मीनाक्षी

4 जनवरी

‘‘11 साल की नेहा काफी अच्छा नाचती थी वह बूगी बूगी सहित तीन टीवी रियलिटी शो में अपनी इस कला का लोहा मनवा चुकी थी।’’नेहा डांस के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देने की माता-पिता की जिद की वजह से तनाव में थी।’’
‘‘स्टैंडर्ड सात में पढ़ने वाले सुसशांत पाटिल सोमवार की सुबह सात बजे स्कूल आए, लेकिन क्लास में नहीं दिखे हाजिरी के वक्त उनकी गैरमोजूदगी देख उन्हें खोजा जाने लगा तो टॉयलेट में उनकी लाश झूलती पाई गई। बताया जाता है पढ़ाई में असफलता को लेकर दबाव में था।’’
‘‘दादर के शारदा आश्रम स्कूल के छात्र सुशांत के बारे में पुलिस का कहना है कि वह सेमेस्टर परीक्षा में चार विषयों में फेल हो गया था सी से उपजे अवसाद के चलते उसने यह खतरनाक कदम उठाया।’’
मेडिकल की पढ़ाई करने वाली 18 साल की भजनप्रीत भुल्लर ने भी पवई स्थित अपने घर पर खुदकशी कर ली। वह सायकोथेरेपी की छात्र भजनप्रीत फेल हो चुकी थी।
नजफगढ़ के नंदा एंक्लेव में उन्नीस साल की रीना ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसके पास से एक नोट मिला है जिसमें उसने अपनी मर्जी से खुदकुशी करने की बात लिखी है। वह कैर गांव स्थित भगिनी निवेदिता कालेज में पढ़ती थी। उसके पिता श्री ओम फौज से रिटायर है। पुलिस को जांच में पता चला है कि वह पिछले कुछ समय से तनाव में रहती थी।
दक्षिण पुरी की रहने वाली हिमांशी के प्री-बोर्ड परीक्षा में कम अंक आए थे और वह तीन विषय में फेल हो गई थी। छात्र की एक नोटबुक पुलिस को मिली है जिसमें उसने गत 25 दिसंबर को आए दिन मां द्वारा डांटने-फटकारने की बात लिखी है। उसके परिजनों का आरोप है कि कम अंक लाने पर छात्र के साथ स्कूल में गलत व्यवहार किया जाता था जिस कारण से उसने खुदकुशी कर ली।
यदि हाल में हुई इन घटनाओं की तरह नजर डालें तो ज्यादातर बच्चों ने पढ़ाई को लेकर दबाव बढ़ा, माता-पिता अनबन को लेकर आत्महत्या की है। अधिकांश बच्चों पढ़ाई के दबाव से परेशान थे। मनोचिकित्सकों के मुताबिक आइडियल चाइल्ड सिंड्रोम से ग्रस्त अभिभावक बच्चों को स्पेशल किड से स्मार्ट किड तथा स्मार्ट किड से सुपर किड बनाना चाहते हैं।
आज अभिभावक अपने बच्चों को लेकर महत्वाकांक्षी हो गए हैं। वे चाहते हैं कि उनका बच्चा रातो रात सुपर सितारा बन जाए लेकिन इस दबाव से बचपन खोता जा रहा है। दूसरे वे अपने खोए हुए सपनों को बच्चों के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं। इसके कारण वे बच्चों को थोड़ी देर भी खेलने जाने नहीं देते। खिलापिला कर सुला देना फिर उठते ही पढ़ने के लिए कहना आदि बातें कई बार उन्हें बेहद तनाव में ले आती हैं. इससे बच्चों की रही सही परफॉरमेंस भी गड़बड़ा जाती है। कोमल सपनों पर तब नजर लग जाती है जब उसमें माता-पिता अपने सपनें जोड़ देते हैं। थोपी हुई चीज उनको पसंद नहीं आती और यहीं से पैदा होते हैं तनाव। यह तनाव पढ़ाई के प्रति अरुचि तो पैदा करते ही हैं विद्रोही भी बनाते हैं।
बच्चों में गहराती निराशा स्वपनहीनता की चरम सीमा स्थिति है आत्महत्या। बच्चों आखिरकार आत्महत्या क्यों कर रहे हैं उन्हें क्यों लगता है कि इस दुनिया में अब उनकी किसी को जरूरत नहीं है या दुनिया उनके किसी काम की नहीं। इन सवालों के जवाब में डॉ. अरुण कुमार कहते हैं कि बच्चों जिन प्रकट कारणों के चलते आत्महत्या कर रहे हैं उनमें तीन कारण सबसे प्रमुख हैं जीवन की जटिलता के दबाव, बढ़ता एकाकीपन और प्रतियोगिता में पिछड़ने की आशंका। गौर करने की एक महत्वपूर्ण बात यह भी है एक महीने में दिल्ली के 4 बच्चों ने आत्महत्या केवनल 5 से 18 साल की आयु समूह के थे यानी किशोर और उससे पहली की आयु के।
बच्चों को आत्महत्या के लिए उकसाने वाला एक और महत्वपूर्ण तथ्य है उनकी जिन्दगी में बढ़ा एकाकीपन पहले एकाकीपन सिर्फ अति संपन्न लोगों की जिंदगी का हिस्सा था पिछले कुछ सालों से शहरी जीवन जिस कदर जटिल और महंगा हुआ है उसके कारण आम मध्यम वर्गीय घरों में भी महिलाओं का नौकरी करना भी अनिवार्य हो गया है। ऐसे में उन वर्गो के बच्चों भी अब अकेलेपन की समस्या ङोल रहे हैं। जो पहले घरों के अभावों या माता-पिता के बीच की लड़ाइयों से भले परेशान रहते थे लेकिन उनकी जिंदगी में मां बाप की दूरी नहीं थी।बच्चों की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार जो एक तथ्य है वह मौजूद पढ़ाई का ढ़ांचा। आज मां-बाप नहीं, बच्चों खुद अपने से इतनी ज्यादा उम्मीद करने लगे हैं कि वे बच्चों कम रोबोट में तब्दील हो गए हैं।
दूसरी तरफ पहले पाठ्यक्रम औसत बुद्धि वाले बच्चों को ध्यान में रख कर बनाया जाता था लेकिन जैसे-2 प्रतियोगिता बढ़ रही है पाठ्यक्रमों का गठन भी जीनियस के हिसाब से किया जा रहा है। नतीजतन जरूरत से ज्यादा होमवर्क, हर हफ्ते यूनिट टेस्ट और परीक्षा का जबाव हमेशा बना रहता है। इस पर भी अभिभावक बच्चों की प्रतिभा का मूल्यांकन किए बिना उससे हमेशा अव्वल आने की उम्मीद करते हैं। यही अपेक्षा बच्चों को कुंठित बनाती है और आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करती है।

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