#महंगाई मंत्री हैं शरद पवार: गडकरी
-भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कृषि मंत्री शरद पवार को 'महंगाई मंत्री' की संज्ञा दी है। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह महंगाई पर खामोश हैं।
#ठंड से मरने वालों की संख्या400, विमान-रेल सेवा प्रभावित
-उत्तर भारत में घने कोहरे के साथ कपकपाती ठंड ने अब तक 408 जानें ले ली हैं।
#अपने मंत्रालय द्वारा अपनी ही किताब खरीदवाने का आरोप
-विदेश मंत्रालय द्वारा इसी महकमे के राज्य मंत्री शशि थरूर की किताबें खरीदी जाने पर एक बार फिर वह विवाद में फंस गए हैं।
#जल्द कोई महिला होगी रिजर्व बैंक गवर्नर: प्रणव मुखर्जी
-वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने शनिवार को उम्मीद जताई कि जल्द कोई महिला भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद पर दिखाई देगी। अभी तक इस पद पर सिर्फ पुरुर्षों का वर्चस्व रहा है।
#वेतनभोगियों की कटेगी जेब, अप्रैल 2009 से भत्तों पर टैक्स
-सरकार ने वेतनभोगी कर्मचारियों के आवास व यात्रा जैसे विभिन्न अनुलाभ भत्तों पर कर की गणना के नए नियमों को अधिसूचित कर दिया है। इससे वेतनभोगी वर्ग पर कर का बोझ और बढ़ जाएगा।
#बिंद्रा की धमकी, भारतीय खेल जगत में तूफान
-हॉकी इंडिया और खिलाड़ियों की 'जंग' थमने के 48 घंटे के भीतर ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की संन्यास की धमकी से भारतीय खेल जगत में नया विवाद पैदा हो गया है। 27 वर्षीय भारतीय निशानेबाज ने कहा है कि वे ट्रायल से संबंधित नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के रवैये से हताश हैं।
#प्रचंड के दुष्प्रचार से भारत निराश
-विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने भारत के खिलाफ प्रचंड की आधारहीन बयानबाजी को लेकर माआवोदी प्रमुख से दो टूक में कहा कि उनकी बातों ने बहुत अधिक निराश किया है और आधारहीन दुष्प्रचार द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है।
#प्रेक्टिकल में मनमाफिक नंबर नहीं दे सकेंगे प्राइवेट स्कूल
-बोर्ड परीक्षा में अब प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों को हरियाणा शिक्षा बोर्ड परीक्षार्थियों को उनकी गतिविधियों के आधार पर किए गए आंतरिक मूल्यांकन का बाकायदा रिकॉर्ड रखना होगा।
APNI DUNIYA ...... OUR WORLD
Sunday, January 17, 2010
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Sharm ka Vishaya Hai....!
Ye kab tak chalega ?
ANAND KUMAR
super 30..... renowned institute for IIT JEE in India.
आखिरकार आत्महत्या क्यों कर रहे हैं बच्चे ?
- मीनाक्षी
4 जनवरी
‘‘11 साल की नेहा काफी अच्छा नाचती थी वह बूगी बूगी सहित तीन टीवी रियलिटी शो में अपनी इस कला का लोहा मनवा चुकी थी।’’नेहा डांस के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देने की माता-पिता की जिद की वजह से तनाव में थी।’’
‘‘स्टैंडर्ड सात में पढ़ने वाले सुसशांत पाटिल सोमवार की सुबह सात बजे स्कूल आए, लेकिन क्लास में नहीं दिखे हाजिरी के वक्त उनकी गैरमोजूदगी देख उन्हें खोजा जाने लगा तो टॉयलेट में उनकी लाश झूलती पाई गई। बताया जाता है पढ़ाई में असफलता को लेकर दबाव में था।’’
‘‘दादर के शारदा आश्रम स्कूल के छात्र सुशांत के बारे में पुलिस का कहना है कि वह सेमेस्टर परीक्षा में चार विषयों में फेल हो गया था सी से उपजे अवसाद के चलते उसने यह खतरनाक कदम उठाया।’’
मेडिकल की पढ़ाई करने वाली 18 साल की भजनप्रीत भुल्लर ने भी पवई स्थित अपने घर पर खुदकशी कर ली। वह सायकोथेरेपी की छात्र भजनप्रीत फेल हो चुकी थी।
नजफगढ़ के नंदा एंक्लेव में उन्नीस साल की रीना ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसके पास से एक नोट मिला है जिसमें उसने अपनी मर्जी से खुदकुशी करने की बात लिखी है। वह कैर गांव स्थित भगिनी निवेदिता कालेज में पढ़ती थी। उसके पिता श्री ओम फौज से रिटायर है। पुलिस को जांच में पता चला है कि वह पिछले कुछ समय से तनाव में रहती थी।
दक्षिण पुरी की रहने वाली हिमांशी के प्री-बोर्ड परीक्षा में कम अंक आए थे और वह तीन विषय में फेल हो गई थी। छात्र की एक नोटबुक पुलिस को मिली है जिसमें उसने गत 25 दिसंबर को आए दिन मां द्वारा डांटने-फटकारने की बात लिखी है। उसके परिजनों का आरोप है कि कम अंक लाने पर छात्र के साथ स्कूल में गलत व्यवहार किया जाता था जिस कारण से उसने खुदकुशी कर ली।
यदि हाल में हुई इन घटनाओं की तरह नजर डालें तो ज्यादातर बच्चों ने पढ़ाई को लेकर दबाव बढ़ा, माता-पिता अनबन को लेकर आत्महत्या की है। अधिकांश बच्चों पढ़ाई के दबाव से परेशान थे। मनोचिकित्सकों के मुताबिक आइडियल चाइल्ड सिंड्रोम से ग्रस्त अभिभावक बच्चों को स्पेशल किड से स्मार्ट किड तथा स्मार्ट किड से सुपर किड बनाना चाहते हैं।
आज अभिभावक अपने बच्चों को लेकर महत्वाकांक्षी हो गए हैं। वे चाहते हैं कि उनका बच्चा रातो रात सुपर सितारा बन जाए लेकिन इस दबाव से बचपन खोता जा रहा है। दूसरे वे अपने खोए हुए सपनों को बच्चों के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं। इसके कारण वे बच्चों को थोड़ी देर भी खेलने जाने नहीं देते। खिलापिला कर सुला देना फिर उठते ही पढ़ने के लिए कहना आदि बातें कई बार उन्हें बेहद तनाव में ले आती हैं. इससे बच्चों की रही सही परफॉरमेंस भी गड़बड़ा जाती है। कोमल सपनों पर तब नजर लग जाती है जब उसमें माता-पिता अपने सपनें जोड़ देते हैं। थोपी हुई चीज उनको पसंद नहीं आती और यहीं से पैदा होते हैं तनाव। यह तनाव पढ़ाई के प्रति अरुचि तो पैदा करते ही हैं विद्रोही भी बनाते हैं।
बच्चों में गहराती निराशा स्वपनहीनता की चरम सीमा स्थिति है आत्महत्या। बच्चों आखिरकार आत्महत्या क्यों कर रहे हैं उन्हें क्यों लगता है कि इस दुनिया में अब उनकी किसी को जरूरत नहीं है या दुनिया उनके किसी काम की नहीं। इन सवालों के जवाब में डॉ. अरुण कुमार कहते हैं कि बच्चों जिन प्रकट कारणों के चलते आत्महत्या कर रहे हैं गौर करने की एक महत्वपूर्ण बात यह भी है एक महीने में दिल्ली के 4 बच्चों ने आत्महत्या केवनल 5 से 18 साल की आयु समूह के थे यानी किशोर और उससे पहली की आयु के।
बच्चों को आत्महत्या के लिए उकसाने वाला एक और महत्वपूर्ण तथ्य है उनकी जिन्दगी में बढ़ा एकाकीपन पहले एकाकीपन सिर्फ अति संपन्न लोगों की जिंदगी का हिस्सा था पिछले कुछ सालों से शहरी जीवन जिस कदर जटिल और महंगा हुआ है उसके कारण आम मध्यम वर्गीय घरों में भी महिलाओं का नौकरी करना भी अनिवार्य हो गया है। ऐसे में उन वर्गो के बच्चों भी अब अकेलेपन की समस्या ङोल रहे हैं। जो पहले घरों के अभावों या माता-पिता के बीच की लड़ाइयों से भले परेशान रहते थे लेकिन उनकी जिंदगी में मां बाप की दूरी नहीं थी।बच्चों की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार जो एक तथ्य है वह मौजूद पढ़ाई का ढ़ांचा। आज मां-बाप नहीं, बच्चों खुद अपने से इतनी ज्यादा उम्मीद करने लगे हैं कि वे बच्चों कम रोबोट में तब्दील हो गए हैं।
दूसरी तरफ पहले पाठ्यक्रम औसत बुद्धि वाले बच्चों को ध्यान में रख कर बनाया जाता था लेकिन जैसे-2 प्रतियोगिता बढ़ रही है पाठ्यक्रमों का गठन भी जीनियस के हिसाब से किया जा रहा है। नतीजतन जरूरत से ज्यादा होमवर्क, हर हफ्ते यूनिट टेस्ट और परीक्षा का जबाव हमेशा बना रहता है। इस पर भी अभिभावक बच्चों की प्रतिभा का मूल्यांकन किए बिना उससे हमेशा अव्वल आने की उम्मीद करते हैं। यही अपेक्षा बच्चों को कुंठित बनाती है और आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करती है।
4 जनवरी
‘‘11 साल की नेहा काफी अच्छा नाचती थी वह बूगी बूगी सहित तीन टीवी रियलिटी शो में अपनी इस कला का लोहा मनवा चुकी थी।’’नेहा डांस के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देने की माता-पिता की जिद की वजह से तनाव में थी।’’
‘‘स्टैंडर्ड सात में पढ़ने वाले सुसशांत पाटिल सोमवार की सुबह सात बजे स्कूल आए, लेकिन क्लास में नहीं दिखे हाजिरी के वक्त उनकी गैरमोजूदगी देख उन्हें खोजा जाने लगा तो टॉयलेट में उनकी लाश झूलती पाई गई। बताया जाता है पढ़ाई में असफलता को लेकर दबाव में था।’’
‘‘दादर के शारदा आश्रम स्कूल के छात्र सुशांत के बारे में पुलिस का कहना है कि वह सेमेस्टर परीक्षा में चार विषयों में फेल हो गया था सी से उपजे अवसाद के चलते उसने यह खतरनाक कदम उठाया।’’
मेडिकल की पढ़ाई करने वाली 18 साल की भजनप्रीत भुल्लर ने भी पवई स्थित अपने घर पर खुदकशी कर ली। वह सायकोथेरेपी की छात्र भजनप्रीत फेल हो चुकी थी।
नजफगढ़ के नंदा एंक्लेव में उन्नीस साल की रीना ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसके पास से एक नोट मिला है जिसमें उसने अपनी मर्जी से खुदकुशी करने की बात लिखी है। वह कैर गांव स्थित भगिनी निवेदिता कालेज में पढ़ती थी। उसके पिता श्री ओम फौज से रिटायर है। पुलिस को जांच में पता चला है कि वह पिछले कुछ समय से तनाव में रहती थी।
दक्षिण पुरी की रहने वाली हिमांशी के प्री-बोर्ड परीक्षा में कम अंक आए थे और वह तीन विषय में फेल हो गई थी। छात्र की एक नोटबुक पुलिस को मिली है जिसमें उसने गत 25 दिसंबर को आए दिन मां द्वारा डांटने-फटकारने की बात लिखी है। उसके परिजनों का आरोप है कि कम अंक लाने पर छात्र के साथ स्कूल में गलत व्यवहार किया जाता था जिस कारण से उसने खुदकुशी कर ली।
यदि हाल में हुई इन घटनाओं की तरह नजर डालें तो ज्यादातर बच्चों ने पढ़ाई को लेकर दबाव बढ़ा, माता-पिता अनबन को लेकर आत्महत्या की है। अधिकांश बच्चों पढ़ाई के दबाव से परेशान थे। मनोचिकित्सकों के मुताबिक आइडियल चाइल्ड सिंड्रोम से ग्रस्त अभिभावक बच्चों को स्पेशल किड से स्मार्ट किड तथा स्मार्ट किड से सुपर किड बनाना चाहते हैं।
आज अभिभावक अपने बच्चों को लेकर महत्वाकांक्षी हो गए हैं। वे चाहते हैं कि उनका बच्चा रातो रात सुपर सितारा बन जाए लेकिन इस दबाव से बचपन खोता जा रहा है। दूसरे वे अपने खोए हुए सपनों को बच्चों के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं। इसके कारण वे बच्चों को थोड़ी देर भी खेलने जाने नहीं देते। खिलापिला कर सुला देना फिर उठते ही पढ़ने के लिए कहना आदि बातें कई बार उन्हें बेहद तनाव में ले आती हैं. इससे बच्चों की रही सही परफॉरमेंस भी गड़बड़ा जाती है। कोमल सपनों पर तब नजर लग जाती है जब उसमें माता-पिता अपने सपनें जोड़ देते हैं। थोपी हुई चीज उनको पसंद नहीं आती और यहीं से पैदा होते हैं तनाव। यह तनाव पढ़ाई के प्रति अरुचि तो पैदा करते ही हैं विद्रोही भी बनाते हैं।
बच्चों में गहराती निराशा स्वपनहीनता की चरम सीमा स्थिति है आत्महत्या। बच्चों आखिरकार आत्महत्या क्यों कर रहे हैं उन्हें क्यों लगता है कि इस दुनिया में अब उनकी किसी को जरूरत नहीं है या दुनिया उनके किसी काम की नहीं। इन सवालों के जवाब में डॉ. अरुण कुमार कहते हैं कि बच्चों जिन प्रकट कारणों के चलते आत्महत्या कर रहे हैं गौर करने की एक महत्वपूर्ण बात यह भी है एक महीने में दिल्ली के 4 बच्चों ने आत्महत्या केवनल 5 से 18 साल की आयु समूह के थे यानी किशोर और उससे पहली की आयु के।
बच्चों को आत्महत्या के लिए उकसाने वाला एक और महत्वपूर्ण तथ्य है उनकी जिन्दगी में बढ़ा एकाकीपन पहले एकाकीपन सिर्फ अति संपन्न लोगों की जिंदगी का हिस्सा था पिछले कुछ सालों से शहरी जीवन जिस कदर जटिल और महंगा हुआ है उसके कारण आम मध्यम वर्गीय घरों में भी महिलाओं का नौकरी करना भी अनिवार्य हो गया है। ऐसे में उन वर्गो के बच्चों भी अब अकेलेपन की समस्या ङोल रहे हैं। जो पहले घरों के अभावों या माता-पिता के बीच की लड़ाइयों से भले परेशान रहते थे लेकिन उनकी जिंदगी में मां बाप की दूरी नहीं थी।बच्चों की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार जो एक तथ्य है वह मौजूद पढ़ाई का ढ़ांचा। आज मां-बाप नहीं, बच्चों खुद अपने से इतनी ज्यादा उम्मीद करने लगे हैं कि वे बच्चों कम रोबोट में तब्दील हो गए हैं।
दूसरी तरफ पहले पाठ्यक्रम औसत बुद्धि वाले बच्चों को ध्यान में रख कर बनाया जाता था लेकिन जैसे-2 प्रतियोगिता बढ़ रही है पाठ्यक्रमों का गठन भी जीनियस के हिसाब से किया जा रहा है। नतीजतन जरूरत से ज्यादा होमवर्क, हर हफ्ते यूनिट टेस्ट और परीक्षा का जबाव हमेशा बना रहता है। इस पर भी अभिभावक बच्चों की प्रतिभा का मूल्यांकन किए बिना उससे हमेशा अव्वल आने की उम्मीद करते हैं। यही अपेक्षा बच्चों को कुंठित बनाती है और आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करती है।

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